जीवन का उद्देश्य क्या है?

मनुष्य जीवन क्यों मिला है?

जीवन का उद्देश्य क्या है
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संक्षिप्त परिचय

जीवन का सबसे गहरा प्रश्न “जीवन का उद्देश्य क्या है” जिसने इसको नहीं जाना उसका जीवन व्यर्थ है उसके जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है इसलिए जीवन में इन प्रश्नों को जानना जरुरी है- यह जीवन क्यों मिला है? जिंदगी का रहस्य क्या है? जीवन जीने का सही तरीका क्या है? या जीवन जीने के सूत्र क्या है? इन सब प्रश्नों का उत्तर हम आगे जानेंगे|         

हमारा यह कोशिश रहेगा की “हमारे पैदा होने का कारण” को जाने और समझे जिससे हम अपने जीवन को ऊपर उठा सकें इस उम्मीद के साथ की इस विषय पर हम आपको सबसे सठीक और विश्वसनीय उत्तर दें सकें जिससे आपकी जिज्ञासाओं का समाधान हो सकें|                   

इस विषय पर हमने बहुत से किताबों का अध्ययन किया महान चिंतकों से संपर्क किया और उनके विचारों को जाना इसके अलावा अपने ध्यान के गहराइयों से इन प्रश्नों के उत्तर जानने का कोशिश किया और संतुष्ट जवाब भी प्राप्त हुआ जो आपके लिए यहाँ दिया गया है जिससे पाठकों का कल्याण हो सकें|

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विस्तार से समझें

What is the purpose of our life?

जीवन एक स्वयं की यात्रा है जो अपने अन्दर इस यात्रा को करता है वो नदी के उस पार पहुँच जाता है और जो बहार इस यात्रा को करतें है वो अगले जन्म के आने का इंतज़ार करते है – राधा रमण

मनुष्य जीवन क्यों मिला है?

“जीवन के रहस्य को” या “जीवन का उद्देश्य क्या है” हर इन्सान को समझना जरुरी है मेरे इस लेख को दर्जनों किताबो और सालो के प्रैक्टिकल अनुभवों के आधार पर आपके लिए लिख रही हूँ अतः इसको पूरा पढ़ने के बाद ही आप अपनी राय रखें या कोई निष्कर्ष निकाले, तो चलिए शुरू करते है बड़े ध्यान और बड़े गौर से समझिये| इसमें महर्षि दयानन्द स्वरस्वती, महर्षि पतंजलि और ध्यान से प्राप्त अनुभवों का वर्णन है| 

Balance of stone

जीवन का उद्देश्य क्या है – जिस तरह सुबह होता है, दोपहर होता है, शाम होता है, रात होता है फिर सुबह होता है और यही चक्क्रम चलता रहता है एक बीज को मिट्टी मे डालते है हवा, पानी, सूर्य के सम्मिश्रण से धीरे-धीरे बीज से एक पौधा निकलता है|

और आगे चलकर एक विशाल पेड़ बन जाता है फूल आतें है फल बनते है और फिर उस लाखो फलों मे से एक फल मे लाखो पेड़ छुपा हुआ होता है और यह बात सभी फलो के साथ है, पेड़ से फल नीचे ही गिरता है पहाड़ो से पानी नीचे के दिशा में ही बहता है ऊपर क्यों नहीं जाता है? क्योंकि गुत्वाकर्षण का खेल है| यही प्राकृतिक का नियम है| यह सब प्रकृति का नियम है लेकिन हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है?

हजारों लड़ाईयां जितने से बेहतर है आप खुद को जीते ले, फिर जो जीत आपकी होगी उसे कोई आपसे छीन नहीं सकता – भगवान गौतम बुद्ध

मनुष्य जीवन क्यों मिला है?

जीवन का उद्देश्य क्या है?

हम भगवान, अल्ला, यीसू या किसी को क्यों मानते है क्योकि हमारी आस्था होती है अपने धर्म मे, अपने भगवान मे, अपने देवी-देवता मे, लेकिन क्या ये विरोधाभास नहीं है एक को मानते है दुसरे का विरोध करते है क्या धर्म हमें यही सिखाता है ? मजहब नहीं सिखाता आपस मे बैर रखना लेकिन अगर आप ध्यान से समझे तो यह समझ मैं आता है “मजहब ही सिखाता है आपस मे बैर रखना” है|

Bhagwan Budhha

धार्मिकता का अर्थ क्या है?

हर कोई अपने धर्म मे लोगो को जोड़ना चाहता है और धर्म परिवर्तन करवाना चाहता है क्या यही हमारे जीवन का उद्देश्य है?जीवन का उद्देश्य क्या है?

तो यह धर्म कहाँ रह गया| पाकिस्तान मे अल्पसंख्यको पर अत्याचार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है लोग पैसे के लालच मे क्रिशचन बन जाते है या अन्य धर्म अपनाते है तो इससे समझ मे आता है यह धर्म नहीं है यह तो मजहब है पंथ है| हम कितना ही पूजा-पाठ, कर्म-कांड, दान-पुन्य कर ले लेकिन अगर इसके असली मकसद को नहीं समझेगें तब-तक इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा हमारे जीवन की जो सबसे मुख्य चीज है वो है “प्रकृति” क्योकि हम इसी प्रकृति मे रहते है और ये अपने नियम से चलता है ये किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करता|

जो कोई भी पाप करता है उसको ये दण्ड देता है और जो कोई भी पुन्य करता है उसको पुरुस्कार देती है यह जीवन के हर क्षेत्र मे लागु होता है| यह तो श्रृष्टि के नियम की बात है पढाई, रोजगार, नोकरी, व्यवसाय, स्वस्थ, सम्बन्ध या छोटी से छोटी चीज या बड़ी से बड़ी चीज सब पर लागु होता है इसलिए इन्सान को चाहिए की वो अपने विचारों और कर्मो मे पवित्रता बनाये रखे तो वो धार्मिक है यह धार्मिकता की परिभाषा है|     

धार्मिकता क्या है?

धर्म का मतलब क्या है इसका अर्थ है “जो धारण किया जाये” हिन्दू अपने देवी-देवताओ को मानते है, मुस्लिम अपने अल्लाह को, क्रिसचेंन अपने जीसस को, सबके  धर्म की  परिभाषा अलग-अलग है लेकिन धर्म का असली मतलब क्या है ? धर्म का असली मतलब है – जो सबके लिए एक समान हो, सामान भाव से फलदायी हो जितना हिन्दू को फायदा करे उतना ही अन्य देश-काल-धर्म के लोगों को फायदा करे धर्म तो न उच्च देखती है न नीच, न गोरा न काला, न आमिर न गरीब, न अमेरिकन न चाइनीस, न बर्मा न जपैनीस धर्म तो प्राक्रतिक है|

धूप-गर्मी-बरसात-जाड़ा हर इन्सान पर सामान रूप से प्रभाव डालती है भगवान कैसे सबके अलग-अलग हो सकते है क्योंकि सबका लक्ष्य तो एक ही है फिर मार्ग अलग-अलग कैसे हो सकते है ? अगर हिन्दू देवी-देवता का मार्ग सही है तो मुस्लिम का गलत ईशा-मशी सही तो यह दोनों गलत| फिर सही क्या है ? सही तो सिर्फ एक ही हो सकता है जो सबके लिए सही हो| तो ऐसा क्या है जो सबके लिए सही हो?

आप चाहें जितनी भी किताबें पढ़ ले, कितना भी अच्छा शब्द सुन ले उनका कोई फ़ायदा नही जब तक की आप उनको अपने जीवन मे नहीं अपनाते – भगवान गौतम बुद्ध

Maharshi-Dayanandswarasti

धार्मिकता का महत्व

जिस तरह सूर्य का रौशनी सबके ऊपर बराबर पड़ता है, बरसात का पानी भेदभाव नहीं करता तो क्या अलग-अलग मान्यताओं से हम अपने लक्ष्य को  प्राप्त कर सकते है ? जेहादी निर्दोष लोगो को मारकर जन्नत जाने का दावा करते है उनके आका यही मानते है क्या वो सही है? क्या भूखो को खाना देकर, प्यासे को पानी देकर या जरुरतमंदो की मदत करके स्वर्ग प्राप्त किया जा सकता है? या ऐसा कौन सा तरीका है जिससे हम बार-बार के इस भव-सागर से कैसे मुक्त हो सकते है ???

हर इन्सान को अपना रास्ता स्वयं ही खोजना होता है धार्मिकता का महत्व समझना जरुरी है रास्ते बहुत से है पर आपको अपनी समझ से आगे बढ़ना चाहिए खुद के द्वारा मार्ग ही सही मार्ग है ? यह भी सही नहीं है इससे आत्म संतुष्ठी जरुर होगी लेकिन सही मार्ग क्या है ? क्या गुरु हमारी नईया पर कर सकता है याद रखिये गुरु बिना तो हमारा काम चल जायेगा लेकिन आत्म-शक्ति बिना काम नहीं चलेगा इसलिए जरुरत है अन्दर जाने की, बाहर तो हम जी ही रहे है भौतिक रूप से हमारे मानसिक और आध्यामिक विकास के लिए अन्दर की यात्रा करनी ही पड़ेगी बिना इस पथ पर चले कोई भी मुक्त नहीं हो सकता| कभी नहीं| 

अपना रास्ता स्वयं बनायें हम अकेले पैदा होते है और अकेले मृत्यु को प्राप्त होते हैं इसलिए हमारे अलावा कोई और हमारी किस्मत का फैसला नहीं कर सकता – भगवान गौतम बुद्ध

जिंदगी का रहस्य

क्या जीवन आसन है या कठिन है? जीवन इतना कठिन नहीं है जितना हमने उसे बना दिया है उपरवाले ने हमें सब कुछ देकर भेजा है फिर हम उसका इस्तेमाल क्यों नहीं कर पाते? हम ख़ुशी बहार खोजते है जबकि वो हमारे अन्दर ही है क्योंकि परमात्मा सब कुछ हमें देकर ही भेजा है हम कैसे क्या इस्तेमाल करते हैं यह हमारे ऊपर है|

जीवन जीने का सबसे महत्वपूर्ण है चीज़ है – “जागरण” इसका मतलब जागते रहना, होश मैं रहना, दृष्टा बने रहना, योग मे रहना, ध्यान मैं रहना मतलब ध्यान से  काम करना है अपने जीवन को होशपूर्वक होके जीना है और जिस दिन यह परिवर्तन आ गया आपके जीवन मे चमत्कार और क्रान्ति घटित होने लग जाएगी, अगर आप कुछ समय का भी इसका प्रयास करते है तो यह एक महान क्षण होगा आपके लिए| विश्वास करिए| आपको करना क्या है?

जन्म और जीवन क्या है?

विज्ञानिक दृष्टिकोण से समझे तो यह जीव असंख्य सूक्ष्म काशिकाओं(cells) से बना है मूल तो पांच तत्व से हमारा शरीर बना है आकाश, जल, पृथ्वी, वायु और हवा बिना इसके जीवन संभव ही नहीं है| विज्ञानिक के मुताबिक प्रकाश रासयनिक प्रक्रिया के द्वारा जीव की उत्पत्ति हुई है लेकिन एक बात तो साफ़ है इस हाडमॉस के शरीर में एक चेतना है बिना उसके यह जन्म-जीवन सब बेमानी होगी| तो वैज्ञानिक दृष्टि से जीवन का उद्देश्य क्या है? इसपर भी विचार करना होगा|

एक शक्ति है जिसे ऊर्जा कहते है वही जीवन है और वह हर प्राणी में मौजूद है उसके शरीर से निकलने के बाद शरीर निर्जीव, प्राणहीन हो जाता है जबतक उर्जा शरीर में रहता है तबतक उसको मनुष्य कहते है निकलने के बाद मुर्दा तो शरीर में उर्जा का महत्व है|

मनुष्य के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्या है?

इस प्रश्न का उत्तर हर किसी का अलग-अलग हो सकता है जैसे सुख-शांति, मान-सम्मान, धन-दौलत, स्वास्थ्य आदि हो सकता है लेकिन क्या आत्म-ज्ञान जरुरी नहीं है क्या दुसरे का धन जरुरी है? नहीं-नहीं|

अगर हम ऋषि-मुनि, महात्माओं को देखे वह जीवन से क्या प्राप्त किये – आत्मज्ञान और  मुक्ति|

तो हमें उनसे क्या सीखना चाहिए?

जीवन का उद्देश्य क्या है?

निर्णय आपके ऊपर ……  

मनुष्य जीवन का चरम लक्ष्य क्या है?

मनुष्य जीवन का चरम लक्ष्य तो मुक्ति ही है यानि बार-बार के इस आवागमन से आजादी| इसके लिए हर इन्सान को निरंतर प्रयास करना चाहिए अपने जीवन से कुछ क्षण अपने लिए जरुर निकलना चाहिए इसके लिए ध्यान (Meditation) एक बेहतरीन विकल्प है इसका इस्तेमाल मन को शांत करने, अपने काम पर फोकस करने के लिए किया जा सकता है जिससे हम भौतिक जीवन में प्रगति कर सकें और आध्यामिक प्रगति भी होता रहें| यह तो अंतिम लक्ष्य है लेकिन हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है? प्रश्न गहरा है जवाब भी गहराई से खोजना होगा|

मनुष्य जन्म का मुख्य उद्देश्य क्या है?

हर इन्सान जीवन को अपने-अपने चश्मे से देखता है लेकिन असल में जीवन का उद्देश्य क्या है?

भारत भूषण से अलंकृत महान आचार्य श्री सत्यनारायण गोयेंकाजी के अनुसार जब तक शरीर पर होनेवाली अनुभूति को आधार बनाकर के राग-द्वेष नहीं निकला गया तब तक अंतर मन का स्वाभाव बदलनेवाला नहीं है जब आप यह करेंगें तो सारे प्रकृति का रहस्य खुल जायेगा इसके लिए “विपस्सना ध्यान सबसे बेहतरीन तरीका है|

आपको अपने विचारों पर ध्यान देना है जागते हुए विचार-शुन्य होना है नीद मे नहीं जाना है जागृत अवस्था में विचार-शुन्य होना अपने विचारो से लड़ना नहीं है अपने विचारो को देखना उसका सामना करो “यथा भूत ज्ञान दर्शन” अर्थात् जो घट रहा है उसको देखना यथा वांचित नहीं, यथा कल्पित नहीं, यथा संकल्पित नहीं, यथा भूत अपने आप जो हुआ उसको देखना|

आप जो चाहते हैं उसको अपनी इच्छा से करो उसमे रम जाओ उस काम को पुरे लगन से करो लेकिन ध्यान रहें मशीन नहीं बनना है यहाँ काम हो रहा है और ध्यान कही ओर है अगर ऐसा है तो जो हो रहा है उस स्थिति का सामना करो अब यह जरुरी नहीं आपको ध्यान करने की जरुरत है अगर करते है तो वो बोनस है आप कोई भी कार्य करो उस कार्य की हर एक पल की जानकारी हो, होश हो, जागरण हो, अपना सो प्रतिशत लगाना है|

यही तो ध्यान है यही तो परमात्मा है असल मैं हम परमात्मा को खोजते है लेकिन परमात्मा तो इस चछु से परे की चीज है जहाँ हमारी सोच ख़त्म होती है वही से उसकी यात्रा की शुरुआत होती है जहाँ विज्ञान ख़त्म होता है वही से उसकी सत्ता की शुरुआत होती है मतलब, यह हमारी सोच के परे की चीज है इसको सिर्फ और सिर्फ अनुभूति से ही जाना जा सकता है|

तर्क से नहीं, मजहब से नहीं, धर्म से नहीं परमात्मा को आकर में भी नहीं ढाला जा सकता (मूर्ति रूप मे) अगर हम ऐसा करेंगे तो हम उससे दुरी बना लेंगे जबकि वो तो हर पल हमारे पास ही है कण-कण मे व्याप्त है यही मनुष्य जन्म का मुख्य उद्देश्य है|यहाँ हमने जीवन का उद्देश्य क्या है? इसको समझा ध्यान के दृष्टि कोण से|   

दुनिया की कोई भी चीज कितनी ही कीमती हो, पर परमात्मा ने आपको जो नींद, शांति आनंद और इनसे ज्यादा जो जीवन दिया है उससे ज्यादा कीमती कोई चीज नहीं है आपका जीवन अनमोल है – भगवान गौतम बुद्ध

मनुष्य जन्म का मुख्य उद्देश्य क्या है?

आज से आपको अपने सोच बदलने की जरुरत है अपना धर्म-देवता-मजहब बदलने की जरुरत नहीं है आप जिस जगह जन्म लिए है वो सबसे सही जगह है आपके लिए आपको जो भी जीवन मे मिला है उसका बस धन्यवाद दो और यह कहो आपका लाख-लाख सुक्रिया मेरे स्वस्थ के लिए क्या यह सबसे बड़ा उपहार नहीं है उसके तरफ से ? आपको कृतज्ञं और कृतार्थ होना होगा इस जीवन के लिए चाहे आप कैसा भी जीवन जी रहे हो | आपको अपने आत्म-शक्ति का प्रयोग करना होगा अपने जीवन को सफल करने के लिए “जीवन” शब्द जीवन्तता से बना है जिसका मतलब है “गति” जीवन मैं ठहराव नहीं होना चाहिए गति होना चाहिए|

आपको यह जानके आश्चर्य होगा की इस ब्रम्हाण्ड मैं कुछ भी रुका हुआ नहीं है सबकुछ चल रहा है यहाँ तक की सूर्य भी अपने जगह से हिलता है इसलिए अपने जीवन मे गति दे जैसे-जैसे आप आगे बढेंगे आप पाएंगे की आपके जीवन मैं बदलाव आ रहा है|

आप बहार से जीवन को जानने का प्रयास न करे अपने अन्दर से प्रयास करें जैसे-जैसे आप गहराई मैं जाते जायेंगे जीवन के रहस्य से पर्दा उठता जायेगा भेदन होता जायेगा अणु-परमाणु सब समझ आता जायेगा और आप अपने जीवन मे सुख-शांति का अनुभव करने लगेंगे मैं किसी भौतिक सुख-सुविधा की बात नहीं कर रहा यह अन्तरंग की गहराई की बात है जिसे असली सुख कहते है भौतिक जीवन मे जब हम किसी वस्तु को प्राप्त कर लेते है तो दुसरे की चाह होती है फिर तीसरे की और हम उसी मे उलझे रहते है न तो सुख मिल पाता है न शांति|

जीवन का उद्देश्य क्या है? असल मैं जीवन जीने का जो तरीका है वह इसके विपरीथ है जिसमे हमें पहले आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करना है फिर भोतिक जीवन मे प्रवेश करना चाहिये क्योंकि एक बार आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करने के बाद वो नीचे जा ही नहीं सकता सिर्फ प्रगति-उन्नति-उथान ही जीवन का धेय रह जाता है और वो ऊपर ही ऊपर चढ़ता जाता है|  

मानव को अपने पल-पल को आत्मचिंतन मे लगाना चाहिए क्योंकि हर क्षण हम परम पिता परमेश्वर द्वारा दिया गया समय खो रहे है – स्वामी दयानंद सरस्वती

मनुष्य का जन्म क्यों हुआ है?

जीवन का उद्देश्य क्या है? शांति तो जीवन का अंतिम लक्ष्य है पहले सुख की बात करते है सुख की चाह मे हम सच्चाई से दूर होते जा रहे है क्योकि एक सुख दुसरे को प्रेरित करता है इसी मे हम उलझे हुए है एक बार जब आपको शांति प्राप्त हो जाये तो “सुख” की जरुरत नहीं रह जाती| “शांति” वो चीज है जो आपको सुख के बाद मिलती है यानि यह अंतिम लक्ष्य है लेकिन यह प्राप्त कैसे हो?

Bhagwan-Buddha

देखिये फूल का स्वाभाव है खिलना, पेड़ अपना पका हुआ फल स्वयं नहीं खाता, हवा का स्वाभाव है – बहना और तृप्त करना, पानी शीतलता प्रदान करता है सबका अपना-अपना गुण कर्म स्वाभाव है लेकिन हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है?

यहाँ बात हम पानी की करेंगे क्योकि इसके उदाहरण से हम समझेंगे अपने (दिमाक को) पानी का मूल स्वाभाव क्या है?

शीतलता देना अब पानी को अगर हम गरम करेंगे तो क्या होगा वो गर्म होने लगेगा अपने सामान्य स्वाभाव मे नहीं रह पायेगा लेकिन जैसे ही उस पानी को आप उसके हाल पर छोड़ देंगे वो अपने मूल स्वाभाव मे आ जायेगा उसी प्रकार जब आप अपने दिमाग को उसके हाल पर छोड़ देते है और उसको पूरी तरह से विचारों से मुक्त कर देते है “विचार-शून्य अवस्था मे” तो ये अपने पूर्ण छमता से कार्य करता है|

जब हम ध्यान करते है अधिक से अधिक विश्व-शक्ति प्राप्त करते है ध्यान मे हम जागते है और असली शांति प्राप्त करते है जो अविरल है निरन्तर है कभी न ख़त्म होने वाला धारा प्रवाह शांति है इसमें बहते चले जाते है तो ज्यादा से ज्यादा और ज्यादा विश्व शांति प्राप्त होता जायेगा | यही एक मात्र तरीका है अपने आपको को सुख और शांति देने का यह कोई दिखावा नहीं यह अन्दर की बात है अपनी आत्मा की आवाज को सुनो यही सच्चा धर्म है|

अंत में मैं प्रार्थना करता हूँ की लोग अपने जीवन को यूँ ही व्यर्थ नहीं करेंगे कुछ तो अपने लिए समय निकालिए लोगों की तो आपने बहुत मदत कर लिया, बहुत सेवा सत्कार कर लिया अब थोडा सा- सिर्फ थोडा सा समय अपने लिए निकालिए आपकी मनोदशा ही बदल जाएगी चीजों को देखने का नजरिया ही बदल जायेगा आप धन्य होजेंगे आप एक महान प्रगति की ओर बढ़ चलेंगे| अंत में फिर वही सवाल जीवन का उद्देश्य क्या है? तो जवाब है यही जीवन का उद्देश्य है|

सबका मंगल हो! सबका कल्याण हो! सबकी स्वस्थ मुक्ति हो|

किसी भी रूप में प्रार्थना करना यह प्रभावी है और यह एक क्रिया भी है इसका परिणाम होगा और यह इस ब्रम्हाण्ड का नियम भी है जिसमे हम खुद हैं – स्वामी दयानंद सरस्वती

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निष्कर्ष

जीवन का उद्देश्य सिर्फ खाना-पीना घूमना और मौज करना ही नहीं है ऊपर वाले ने एक उद्देश्य के लिए हमें जन्म दिया है सबसे पहले तो उस उद्देश्य को समझना, जानने के बाद उस पर अमल करना फिर निरंतर प्यास करना जिससे हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकें|

यहाँ हमने समझा मनुष्य जीवन क्यों मिला है? धार्मिकता क्या है? इसका अर्थ क्या है? क्यों जन्म, जीवन फिर मृत्यु होता है? इसके साथ-साथ मनुष्य के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्या है? यानि मानव के जीवन का चरम लक्ष्य क्या है? और सबसे महत्वपूर्ण मनुष्य का जन्म क्यों हुआ है और इसको कैसे सफलतापूर्वक हासिल किया जा सकता है इन सब प्रश्नों को संक्षेप में लेकिन गहराई से समझा|

कुल मिलकर “जीवन का उद्देश्य क्या है” इस विषय पर हमने विस्तार से समझा और जीवन के बारीकियों को जानने का प्रयास किया जिससे जीवन बेहतर हो सके अगर कोई भी उपरोक्त बातों को अपने जीवन में उतरने का प्रयास करेगा तो निश्चित रूप से उसका जीवन बेहतरी के तरफ आगे बड़ेगा इसमें कोई शक नहीं है|

जीवन एक स्वयं की यात्रा है - राधा रमण

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